
Books by Dr. Sanjeev
Sanjeev’s Blog
“जीवन कहीं और बह रहा है : व्याकरण के बाहर एक गुप्त भूगोल में”
जीवन कहीं और बह रहा है : व्याकरण के बाहर एक गुप्त भूगोल में।मेरा जीवन-अनुभव…
वर्तमान
अस्तित्व के गुप्त कोड का जीवित अनुवादक
एक बात हमेशा ग़लत कही गयी। वर्तमान को समय की इकाई कहना ऐसा ही है…
नाम में छिपी सत्ता — जीवन जब भाषा से गुज़रकर व्यवस्था बनता है
भाषा जीवन और समाज के बीच किसी सीधे माध्यम की तरह नहीं बैठी है। वह…
समाज की इंजीनियरिंग: जीवित संबंध से संस्थागत संबंध तक
संबंध प्राकृतिक हैं, समाज संबंध पैदा नहीं करता, यह पहली बात समझ लेनी चाहिए। समाज…
उपस्थित की वर्तमानता
सजगता, जागरूकता, स्पष्टता और प्रामाणिकता — इन सबका असली केंद्र शायद एक ही जगह है:…
जब देखा जाना, होने से बड़ा हो गया
यह टिप्पणी आधुनिक जीवन के एक बहुत गहरे संकट को छूती है — वह संकट…
.c


