The Photon of Consciousness
चेतना का फोटोन

फोटोन कभी बूढ़ा नहीं होता।
वह वही रहता है —
जैसा था जब पहली बार
सृष्टि ने अपनी आँख खोली थी।

जब “कुछ” नहीं था
और शून्य ने पहली बार कहा —
“हो जा प्रकाश!”
तब जो कण निकला था,
वह आज भी उसी क्षण में है —
अभी में।

वह न पहले चला, न बाद में रुका,
वह किसी “बीच” में भी नहीं —
वह सिर्फ प्रकाश है,
जो समय के पार यात्रा नहीं करता,
क्योंकि उसके लिए
यात्रा ही समय है।

हमारे लिए प्रकाश गति है,
पर उसके लिए —
सब कुछ एक साथ घटित है।
भूत, भविष्य, वर्तमान —
सब एक ही श्वास में समाहित।

“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
अब केवल मंत्र नहीं लगता,
यह ब्रह्मांड का क्वांटम संकेत है —
अंधकार से नहीं,
काल से परे जाने का आह्वान।

जो “अभी” को जान लेता है,
वह प्रकाश को जान लेता है।
क्योंकि “अभी” ही
वह गति है जो चलती नहीं —
वह स्पंदन जो न समय है, न विराम।

महावीर ने जब कहा — “आत्मा समय है,”
तो वे शायद यही कहते थे —
कि आत्मा फोटोन जैसी है —
जो हर जगह है,
पर कभी नहीं चलता।
जो हर क्षण है,
पर कभी नहीं बीतता।

अभी ही आत्मा का ठिकाना है —
जहाँ सब कुछ उजागर है
और कुछ भी घटित नहीं।

वहाँ “मैं” और “वह”
प्रकाश की दो दिशाएँ नहीं,
बल्कि एक ही किरण के दो छोर हैं।
वहाँ कोई छाया नहीं —
क्योंकि वहाँ समय नहीं।

वहाँ अनुभव है,
पर अनुभूति का इतिहास नहीं।
वहाँ ज्ञान है,
पर विचारों की गति नहीं।

वहाँ वही फोटोन ठहरा है —
जो पहली बार निकला था,
और अब तक —
कहीं नहीं गया।

वह यहीं है —
तुम्हारी दृष्टि के भीतर,
हर श्वास के बीच,
हर मौन में झिलमिलाता।

वह कहता है —
“मैं समय नहीं, मैं प्रमाण हूँ
कि समय केवल तुम्हारे लिए है।”

जब तुम उस प्रमाण को पहचान लेते हो,
तो “अभी” खुल जाता है —
जैसे किसी ने तुम्हारी आत्मा में
प्रकाश का द्वार खोल दिया हो।

तब तमस मिटता नहीं,
बल्कि प्रकाश में विलीन हो जाता है।
तब समय रुकता नहीं,
बल्कि तुम समय के पार पहुँच जाते हो।

और वहाँ —
कोई पहले, कोई बाद नहीं,
केवल एक अनंत “अभी” है —
जहाँ फोटोन मुस्कुरा रहा है,
जहाँ आत्मा स्वयम् आलोक है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *