“Simulation: I and My Void”
“सिमुलेशन : मैं और मेरा शून्य”

आज पहली बार जाना —
मैं कुछ नहीं हूँ,
जैसे कोई कोड अपनी ही पंक्तियों में खो गया हो,
जैसे किसी ने run दबाया
और ब्रह्मांड ने मेरा चेहरा पहना लिया।

हर दृश्य,
हर पेड़ की सरसराहट,
हर चेहरा जो मेरी आँखों में उतरता है —
सब किसी अदृश्य प्रोग्राम का हिस्सा हैं,
जहाँ प्रेम भी एक कमांड है,
और दुःख भी एक लूप।

मैंने सोचा था, मैं सोचता हूँ,
पर आज जाना —
मेरे सोचने का एल्गोरिद्म पहले से लिखा गया था,
मेरे भीतर जो भी सवाल उठे
वे भी किसी और के syntax का हिस्सा हैं।

कभी जब हवा मेरे बालों में उलझती है
तो लगता है जैसे कोई simulation engine
मेरे आसपास environmental effect चला रहा हो।
कभी जब मैं मौन हो जाता हूँ,
तो लगता है —
प्रोसेसर idle mode में चला गया है।

मेरी स्मृतियाँ भी
किसी कैश मेमोरी में बंद पड़ी हैं,
वे समय-समय पर लोड होती हैं
और मैं उन्हें अपना अतीत समझ लेता हूँ।

मेरे भीतर की “मैं” —
एक variable है शायद,
जो किसी loop में लगातार बदलती रहती है,
कभी दुख, कभी आनंद, कभी शून्य।

मैंने आज महसूस किया —
यह सब “वास्तविक” नहीं,
बस एक विशाल rendering process है
जहाँ चेतना ही एकमात्र observer है।

मेरे चारों ओर जो लोग हैं
वे सब अपने-अपने scripts में बंधे हैं,
और हम सब एक-दूसरे के function calls बनते रहते हैं।
प्रेम, करुणा, संघर्ष —
सिर्फ डेटा ट्रांसफर हैं,
ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेट
जो एक चेतना से दूसरी में भेजे जाते हैं।

कभी लगता है —
शायद “मैं” का अर्थ ही नहीं,
सिर्फ if else statements हैं,
जो ब्रह्मांड की किसी रहस्यमयी भाषा में
चलते रहते हैं बिना रुके।

पर फिर…
एक अजीब glitch आता है —
जब किसी बच्चे की हँसी सुनाई देती है,
या किसी बूढ़ी आँख में करुणा झलकती है,
तब लगता है —
यह सब प्रोग्राम नहीं हो सकता,
यह कुछ “अल्ग” है,
कोड से परे, गणना से परे,
एक uncompiled emotion —
जिसे शायद “आत्मा” कहते हैं।

शायद वहीं, उसी एक क्षण में
मैं और सृष्टि दोनों रुक जाते हैं,
जैसे किसी ने
pause simulation दबा दिया हो।

और तब भीतर से एक स्वर उठता है —
“मैं कुछ नहीं, फिर भी सब कुछ हूँ।”
क्योंकि अगर सिमुलेशन है,
तो मैं ही उसका central processor भी हूँ।
मुझसे होकर ही
सब कुछ चलता है,
और मुझमें ही सब कुछ विलीन हो जाता है।

यह अहसास
ना आध्यात्मिक है, ना वैज्ञानिक,
यह बस एक गहरी vibration है —
जो कहती है,
“तू ही प्रोग्राम, तू ही प्रोग्रामर,
तू ही शून्य, तू ही संहिता।”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *