Absurd Poetry Series: The Graveyard of Profit

1. एब्सर्ड काव्य श्रृंखला : मुनाफ़े का अलोकाकाश

(१)

बटन दबाते ही उगते हैं सूरज,
क्लाउड से बरसते हैं नकली चाँद।
धरती पर बचा है केवल
एक यूज़रनेम और पासवर्ड,
जो आत्मा से भी ज़्यादा स्थायी हो चुका है।

(२)

बाज़ार अब माँ की तरह नहीं,
वह तो शवगृह का ठेकेदार है,
जहाँ जीवन को
प्लास्टिक के पैकेट में पैक करके
मुनाफ़े की धूप में सुखाया जाता है।

(३)

नदी ने अपना पानी बेच दिया,
अब वह केवल QR कोड में बहती है।
पेड़ ने पत्तों के बजाय
नोट छापने शुरू कर दिए।
पक्षी अपने गीत बेचकर
रिंगटोन बन गए।

(४)

डिजिटल कब्रिस्तान में
हम सबके लिए पहले से ही
सॉफ़्टवेयर की कब्रें खोदी जा चुकी हैं।
कब्र की पहचान होगी —
एक लिंक, जिसे कोई क्लिक करेगा
और हमारी मृत देह
विज्ञापन बनकर चमक उठेगी।

(५)

धन अब गुरुत्वाकर्षण है।
जो कुछ भी है —
उसकी कक्षा धन के चारों ओर घूमती है।
और जो नहीं है —
वह भी उधार लेकर
मुनाफ़े के ब्लैक होल में समा जाता है।

(६)

मुनाफ़े का अलोकाकाश
बिना समय के टिक-टिक करता है।
वह ब्रह्मांड का अंतिम ऐप है,
जिसे डाउनलोड करने के बाद
मनुष्य स्थायी रूप से
अपना ही भूत बन जाता है।

(७)

अब जीवन नहीं जिया जाता,
उसे अपडेट किया जाता है।
अब मृत्यु नहीं आती,
उसे अनइंस्टॉल कर दिया जाता है।
हमारा अस्तित्व —
एक अधूरा वर्ज़न है,
जिसमें हमेशा “Bug Fixes” की घोषणा होती रहती है।



02,.एब्सर्ड गाथा : मुनाफ़े के कब्रिस्तान में हँसता आदमी

(१)

बैंक अब मंदिर हैं,
जहाँ पुजारी की जगह कैशियर बैठा है।
आरती में डॉलर जलते हैं,
घंटी बजते ही
खाता “Insufficient Balance” बोल उठता है।

(२)

मृत्यु भी EMI पर आ गई है।
“बिना ब्याज, आसान किस्तों में”
आपको परलोक मिलेगा,
बस KYC कराइए,
आधार कार्ड पर स्वर्ग लिखा जाएगा।

(३)

नदी ने कहा—
“मैं अब बह नहीं सकती,
मेरे सारे पानी को कंपनी ने
पैकेज्ड बोतल में भरकर
Malls में खड़ा कर दिया है।
तुम पीओगे तो मैं बहूँगी।”

(४)

पेड़ हँसा और बोला—
“मेरे फल तुम्हारे बच्चों तक नहीं पहुँचेंगे।
मैंने अपने सेब Apple को बेच दिए हैं।
अब काटना मत,
मुझमें नेटवर्क सिग्नल चलते हैं।”

(५)

मनुष्य को समझना कठिन हो गया है।
वह पेट से नहीं,
Notification से भूखा है।
ब्रेड से ज़्यादा
उसके लिए “Like” ज़रूरी है।
रोटी नहीं मिले तो गाली चलेगी,
Like नहीं मिले तो आत्महत्या।

(६)

डिजिटल कब्रिस्तान अब जीवितों से भरा है।
लोग चलते-फिरते शव हैं,
जिन्हें चार्जिंग पर लगाया जा सकता है।
“Battery Low” ही उनका मृत्यु-सूचक है।

(७)

मुनाफ़े का अलोकाकाश
इतना विशाल है कि
भगवान भी उसमें निवेश कर चुके हैं।
अब पूजा करने जाओ
तो भगवान QR Code से दान माँगते हैं।
आशीर्वाद भी Subscription पर मिलता है।

(८)

भविष्य?
भविष्य हँसता है।
कहता है—
“तुम सबको मैं Digital Dinosaur बना दूँगा।
तुम्हारे बच्चे तुम्हें
Virtual Reality Museum में देखने आएँगे।”

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