(Beyond the Observer – Into the Anti-Space)

अवलोकन से परे : अलोकाकाश की ओर

जब कोई देखता नहीं,

तब अस्तित्व फिर से फैलने लगता है —

जैसे तरंगें अपने स्रोत को पहचान लेती हों।

अवलोकन का बंधन टूटते ही

कण फिर से संभावना में बदल जाते हैं,

और समय —

अपनी दिशा खोकर

स्वयं को शून्य में विलीन कर देता है।

यहीं कहीं —

अलोकाकाश जन्म लेता है।

यह वह प्रदेश है

जहाँ देखने वाला कोई नहीं,

इसलिए देखा जाने वाला भी नहीं।

यहाँ न कण हैं, न तरंग,

न प्रकाश है, न अंधकार —

बस वह शुद्ध रिक्ति है

जो सबको सम्भव बनाती है।

यह वही क्षण है

जहाँ “होना” और “न होना”

एक-दूसरे में विलीन हैं,

जहाँ ब्रह्मांड अपनी परछाई देखता है,

पर परछाई भी आँख बंद कर लेती है।

यहाँ कोई Observer Effect नहीं —

क्योंकि यहाँ कोई Observer नहीं।

यह Anti-Observation का क्षेत्र है,

जहाँ चेतना स्वयं में लीन है,

और पदार्थ,

सिर्फ स्मृति का एक अवशेष।

अलोकाकाश —

वह मौन जो सब तरंगों से परे है,

वह स्थिरता जो गति को जन्म देती है,

वह शून्यता

जिसमें ब्रह्मांड अपनी आँखें बंद करके

फिर से सपना देखता है —

“मैं हूँ।”

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