कभी जानना
नदी के संग बहना था —
अनंत की दिशा में,
बिना तट की चिंता किए।
अब जानकारी है —
बंद बोतलों में भरी नदी,
लेबल लगी, मापी हुई, सुरक्षित,
पर बहती नहीं।
जानना —
एक अनुभव था,
जहाँ शब्द जन्म लेते थे
मौन की गोद से।
जानकारी —
वह स्मृति है
जो शब्दों को कब्र में सजा देती है।
जानना परिवर्तन है,
यह “मैं” को गलाता है
और नये अर्थ में ढाल देता है।
जानकारी स्थिर है —
यह “मैं” को जकड़ती है,
कहती है — “तुम पहले से जानते हो।”
जानना खुलापन है,
जिसमें हर उत्तर
एक नया प्रश्न बनता है।
जानकारी बंद द्वार है,
जहाँ हर प्रश्न
उत्तर के भार से दम तोड़ देता है।
जानना
अस्तित्व का नृत्य है —
जहाँ ज्ञाता और ज्ञेय मिटकर
केवल अनुभूति शेष रहती है।
जानकारी
वह ठोस दीवार है
जो अनुभूति को डेटा में बदल देती है।
हमने सोचा —
हमने दुनिया समझ ली है,
पर शायद
हमने केवल उसे माप लिया है।
जानना अनंत का स्पर्श है,
जानकारी सीमाओं का अनुबंध।
एक बढ़ाता है चेतना का क्षितिज,
दूसरा बनाता है उसका नक्शा।
पर नक्शा कभी यात्रा नहीं होता।
और यात्रा बिना अनजाने के
संभव नहीं।
इसलिए —
जो जानना चाहता है,
उसे जानकारी से मुक्त होना होगा।
क्योंकि
सत्य न तो लिखा जा सकता है,
न संग्रहित —
वह केवल जिया जा सकता है।

