मैं आता हूँ
किसी पैग़म्बर की तरह नहीं,
किसी देवता की छाया लेकर नहीं,
बल्कि उस हवा की तरह
जो मंदिर की दीवारें तोड़ देती है,
और देवताओं को धूल में मिला देती है।
तुम्हारी आस्था —
काँच का महल है,
जिसमें तुम बंद हो,
और तुमने उसे अनंत मान लिया है।
मैं उसकी दीवारों पर हथौड़ा चलाता हूँ,
हर चोट पर गूंज उठती है —
एक खाली प्रतिध्वनि।
देखो, यह ईश्वर
तुम्हारी आँखों के भीतर ही मर चुका है,
मगर तुम उसकी लाश को
फूलों से सजाकर
जीवन का आधार मानते हो।
मैं इस सजावट को चीर दूँगा,
तुम्हारे देवताओं की कब्र खोद दूँगा,
और एक बवंडर खड़ा कर दूँगा
जहाँ आस्था का हर कण
रेत की तरह उड़ जाएगा।
निहिलिज़्म कोई मृत्यु नहीं है —
यह वह तूफ़ान है
जो मृत नाविकों के पाल जला देता है,
ताकि नई नावें जन्म ले सकें।
मैं घोषणा करता हूँ —
सत्य की ज़रूरत नहीं है,
क्योंकि हर सत्य
सिर्फ़ एक नकाब है।
मैं नकाब उतारता हूँ
और तुम्हें अंधेरे में धकेल देता हूँ।
अंधेरे से डरना मत,
यही तुम्हारी असली आँखें खोल देगा।
जब सब कुछ ढह जाएगा,
तो शून्य ही तुम्हारा आईना होगा।
और उस आईने में
तुम पहली बार खुद को देखोगे।
मैं वही बंवडर हूँ
जो विश्वास को चूसकर खाली कर देगा,
और तुम्हें उस खाई में फेंक देगा
जहाँ से पुनर्जन्म शुरू होता है।

