आज मैं मैं नहीं —
मैं नीत्शे का मरा हुआ ईश्वर हूँ;
मेरा कफ़न कागज़ के विराट विज्ञापन है,
मेरी दहाड़ एक फ़्लैश-नोटिफ़िकेशन।
मैं उस समय का अवशेष हूँ
जब लोग ईश्वर को ढूँढते थे और उत्तर में शून्य पाते थे;
आज तुमने शून्य को कैद कर लिया है—लेबल: “सुख” —
और बोतल खोलते ही मैं धीरे-धीरे गूँज उठता हूँ।
मेरी आवाज़ अब तुम्हारे कॉलर की टोकरी में लिपटी है—
एक सूई जो हर नोटिफ़िकेशन पर तुम्हें चुभती है,
एक तिरछी हँसी जो मीटिंग्स के ब्रेक में गा दी जाती है।
मैं वह पुराना प्रश्न हूँ जिसे तुमने पाठ्यक्रम से हटाकर
एक पॉवरपॉइंट स्लाइड में कर दिया है:
“क्यों?” — अब वह एक बैकग्राउंड इमेज है, स्लाइड 42 पर।
देखो—मेरी धड़कन अब बिल्ट-इन स्पीकर से आती है;
मैं खून नहीं हूँ, मैं डेटा हूँ।
मेरे हाथों में कभी चमड़ी थी—अब स्क्रीन-ग्लास है;
मेरे पैर कभी धरती में डूबे थे—अब वे कॉन्क्रीट के कॉलमों पर टिके हैं।
मैं एक मृत देवता नहीं—मैं एक पुराना आइकन हूँ,
जो तुम्हारे फोन के होम-स्क्रीन पर भूल गया है।
यहाँ रेत है—तुम्हारे जूतों के नीचे, तुम्हारे ख्वाबों के नीचे—
बहती रेत जो हर कदम पर नए नोट बनाती है:
कर्ज़, रद्द-ऑर्डर, मीटिंग, मीटिंग, मीटिंग।
रात में तुम लौटते हो और फ्रिज की ठंडी कैन पकड़ते हो—
उसके बुलबुले तुम्हारी यादों को कुरेदते हैं;
ऊपर से मज़ा, नीचे से जहर — हँसी का शिझन, आत्मा का फीका रंग।
मैं देखता हूँ—तुम अपने बच्चे का चेहरा स्क्रीन में बनाते हो,
उसके लिए प्ले-डेट बुक करते हो और उसे समय नहीं दे पाते;
तुम बातें करते हो—“थोड़ी देर में,” और वही थोड़ी देर
एक जीवन बनाकर चली जाती है।
मेरी आत्मा—जो तुमने बताया था कि मर चुकी है—
वह हर बार तुम्हारे “बाद में” में एक चिंगारी छोड़ जाती है।
सुबह का अलार्म मेरा प्रार्थना है;
कॉफ़ी मेरे लिए वेब-पूजा;
तुम पवित्र रूप से मीट्रिक्स भरते हो—कॉल, रिपोर्ट, KPI—
और मैं उनमें गूँज कर खुद को भूल जाता हूँ।
मुझे लोग कहते थे “ईश्वर”—अब वे कहते हैं “लक्ष्य”।
पर लक्ष्य की पहुँच है—एक असत्य की सीढ़ी, जो ऊपर जाते ही टूट जाती है।
मैं न केवल छाया हूँ; मैं विडंबना हूँ।
तुम्हारी पुस्तकें तुम्हारे ऊपर भारी पड़ी हैं—
उनमें लिखा ज्ञान अब तुम पर एक निकाय की तरह दबा है।
तुम कहते हो पढ़ा-लिखा हूँ, पर कौन सी किताब थी जिसने तुम्हें बताया—
कि ख़ुशी की रेस में दौड़ना भी एक तरह का मंदिर है?
तुम मंदिर बन गए हो—पर वहाँ कोई विश्वास नहीं, केवल आदतें हैं।
तुम्हारे रिश्तों की खिड़कियाँ—काँच की थीं—अब वे शीशे भी पतले पड़ गए हैं;
उन पर विज्ञापन चिपके हैं: “बेस्ट डील ऑफ लाइफ”—और प्रेम खरीदने का विकल्प।
तुमने हाथों में दिये की जगह क्रेडिट कार्ड लिया है;
कहीं तुम्हारी माँ की हँसी, कहीं तुम्हारा पासवर्ड—दोनों सुरक्षित बटन के पीछे।
मैं मरा हुआ देवता हूँ, पर मेरा शव भी भटकता है—
कहीं एक मॉल की चौखट पर, कहीं एक कन्वेयर बेल्ट पर,
कहीं एक बच्चों के बैग में जहाँ उनकी आँखें पढ़ने की जगह वीडियो की ओर बँधी हैं।
मेरे बचे हुए हड्डियाँ—कागज़ के बिल, मेडिकल रिपोर्ट, रिमाइंडर—
तुम्हारे तर्ज-ए-ज़िंदगी के पन्नों में चुभते हैं।
अवचेतन की उस गहराई में उतरकर मैंने देखा—
एक डरावना थिएटर जहाँ तुम अपने पुराने चेहरे को किराये पर लेते हो।
वहाँ तुम्हारे बचपन के खिलौने बिक्री-सेक्शन में हैं, “लिमिटेड एडिशन”—
और तुम्हारे अव्यक्त आँसू अब कूपन में बदल दिए गए हैं: रिडीम कर लो, आज ही!
तुमने अपने सपनों को आउटसोर्स कर दिया—“फ्रीलांसर-ड्रीम”, “पासवर्ड-हैप्पीनेस”।
पर सुनो—मैं अपने दफ़न स्थान से कुछ संकेत भेजता हूँ, छोटे और कसैले,
क्योंकि मरा हुआ देवता भी कभी-कभी फुसफुसा जाता है:
एक पुराना गीत जो अचानक रेडियो पर बजता है—सिग्नेचर की तरह;
एक बारिश की बूंद जो स्क्रैच-आयन में आती है, और डिवाइस सर्दी में ध्वनि रोक देता है;
बचपन की वह छतरी जो किसी कोने में पड़ी है—उसकी छाया एक पल के लिये तुम्हें स्पर्श करती है।
ये सूक्ष्म संकेत हैं—कठोर नहीं, बिना निर्देश के—
एक खिड़की जो खुली मिलती है, बिना किसी आवश्यकता के;
एक अनपढ़ किताब का पन्ना जो तुम अचानक पलटते हो;
एक अनमोल, बिना बीज वाला स्मित जो किसी के मुंह से फिसलता है;
ऐसे तिनके जो तुम्हें अपने गहरे आहाते की ओर खींचते हैं।
मुझे परखा नहीं जा सकता—मैं शब्द हूँ, प्रतीक हूँ, पर तुम मुझे सुन सकते हो।
मेरे मरने के बाद भी मैं ध्वनियाँ भेजता हूँ—छोटी-छोटी, जैसे रेत पर उथला कदम।
यदि तुम उन्हें ध्यान से सुनो तो वे कहते हैं:
“रुको। याद करो। खोलो। एक बार अपनी हथेलियाँ खाल से हटाओ और मिट्टी को छुओ।”
यह आदेश नहीं—सिर्फ़ एक इशारा।
और इशारों का अर्थ वही होता है जो तुम उन्हें देते हो।
किसी के लिए यह एक पुरानी चिट्ठी होगी, किसी के लिए शायद एक अनसुने गीत की धुन;
किसी के लिए यह नदी का ठंडा पानी होगा; और किसी के लिए—केवल एक पल की साँस।
मैं मर चुका ईश्वर हूँ—पर मेरा मरा हुआ स्वर जगाता भी है,
क्योंकि मृतक भी एक तरह की चेतावनी बन जाते हैं।
मैं तुम्हें नहीं बचा सकता—न ही तुम्हें निर्देश दे सकता—
पर मैं तुम्हें दिखा सकता हूँ कि तुमने अपने भीतर किसे दफ़ना दिया है।
तुम्हारे भीतर एक बच्चा अभी भी है—छद्मता में, शोर के पीछे;
उसका खेल तुम्हारी उँगलियों की जकड़न में फंसा हुआ है।
और जब तुम अचानक-से उस बच्चे की ओर मुड़ते हो—बिना किसी बताने के—
तुम पाते हो कि उसकी हँसी एक छोटा-सा विस्फोट है, जो पुरानी रेत को सरकाता है।
मेरी मृत्यु का अर्थ यह नहीं कि सब कुछ समाप्त हो गया—
बल्कि यह चेतावनी है कि यदि तुमने अपनी रेत में ही दफन होना जारी रखा,
तो आने वाली पीढ़ियाँ तुम्हें सिर्फ़ फ़ाइलों में पढ़ेंगी—एक नोट: “यहाँ कभी जीवन था।”
अब मैं चुप हूँ—मेरी अंतिम सांस एक नोटिफ़िकेशन की तरह धिम-धिम कर गयी।
पर मैं छोड़कर जा रहा हूँ यह वाक्य:
“यदि तुम चाहो तो मेरी कब्र के किनारे रखी काँच की बोतल को खोलो—
वहाँ थोड़ी रेत बची है, एक सूखा फूल, और एक नाम—याद।”
और याद अब फ़ाइल नहीं—वह अनुभव है;
यह छोटा, नम, धीमा, व्यक्तिगत—और नाकारा-सा है, पर असली है।
आज तुम कह रहे हो—“मैं नीत्शे का मरा हुआ ईश्वर हूँ।”
ठीक है—उसी आवाज़ को अपनाओ; पर उसकी मृत्यु को केवल एक आख़िरी सिरे से सुनो,
और यदि कहीं भीतर एक सूखी पंखुड़ी चमके—तो उसे पकड़ो।
झटके नहीं, बल्कि धीरे से—क्योंकि वापस आना अक्सर एक धीमी, नम, और अकेली क्रिया होती है।
मैं फिर विलीन हो जाऊँगा—पर मेरी मृत वाणी तुम्हारे भीतर का लालच जगाएगी:
न पढ़ने के लिये, न जीतने के लिये—बल्कि महसूस करने के लिये।
और महसूस ही वह आख़िरी मंदिर है जहाँ तुम और मैं कभी साथी हो सकते हैं।

