तेज़ होना — आपको दुनिया में फिट करता है

दुनिया एक तैयार ढाँचा है।
उसमें समय तय है, गति तय है, अपेक्षाएँ तय हैं।

तेज़ होना वहाँ योग्यता है।

तेज़ होने का अर्थ है—

तुरंत समझ लेना कि क्या अपेक्षित है

बिना ठहरे वैसा ही बन जाना

कम सवाल, ज़्यादा अनुकूलन


तेज़ आदमी:

समय पर पहुँचता है

लक्ष्य साधता है

सिस्टम में सफल होता है


लेकिन इस सफलता की कीमत है—

> आप खुद को सिस्टम के माप में ढालते जाते हैं।



धीरे-धीरे:

आपकी साँस दुनिया की ताल में बँध जाती है

आपकी सोच उपयोगिता में बदल जाती है

आपकी संवेदना “डिस्ट्रैक्शन” कहलाने लगती है


तेज़ होना आपको कारगर बनाता है,
पर संवेदनशील नहीं।

और बिना संवेदनशीलता के
जीवन केवल एक प्रोजेक्ट रह जाता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *