डिजिटल कब्रिस्तान : एक एब्सर्ड दृश्य
मनुष्य चलता है
लेकिन उसकी चाल—
डेटा की पंक्तियों जैसी सीधी और सपाट है।
उसकी हँसी—
केवल एक इमोजी का गोल चेहरा है।
उसका रोना—
सिर्फ एक “error sound” है
जो मशीन बार-बार दोहराती है।
नदी अब बहती नहीं,
वह scrolling text बन गई है—
पानी की जगह blue pixels झिलमिलाते हैं।
पहाड़—
एक frozen screen हैं,
जहाँ बर्फ की जगह
loading…loading… लिखा है।
जंगल में पक्षियों का स्वर नहीं,
बल्कि notification tones गूँजते हैं।
पेड़ों की पत्तियाँ
server fans की तरह घूमती हैं,
और हवा—
Wi-Fi signal बनकर बहती है।
जमीन—
एक विशाल motherboard है,
जहाँ किसान नहीं,
robots की उंगलियाँ हल चलाती हैं।
और आसमान—
एक digital wallpaper,
जहाँ सितारों की जगह
satellites blink करते हैं।
मनुष्य का जीवन
अब जीवित नहीं,
केवल archived files है।
उसका बचपन—
एक album में,
उसकी जवानी—
reels में,
उसकी मृत्यु—
“account deactivated” की सूचना में।
भविष्य—
डरावना नहीं,
बल्कि एब्सर्ड है:
जीवित होना
obsolete हो जाएगा,
और डिजिटल—
अमरता का नया नाम बन जाएगा।

