जीवन कोई परिभाषा नहीं है—
यह एक घटना है।
हर क्षण घटती हुई।
जीवन वह है
जो साँस और साँस के बीच
ख़ुद को प्रकट करता है।
न विचार के रूप में,
न लक्ष्य के रूप में—
बस होने के रूप में।
जीवन वह स्पंदन है
जो दिल धड़कने से पहले भी था
और धड़कन रुकने के बाद भी रहेगा—
नाम बदल जाएगा,
रूप बदल जाएगा।
जीवन
सुख नहीं है, दुख भी नहीं—
दोनों के बीच
चलती हुई एक खुली प्रक्रिया है।
जहाँ तुम पूरी तरह उपस्थित हो—
वहीं जीवन है।
जहाँ तुम देख रहे हो
बिना पकड़ने की चाह के—
वहीं जीवन है।
न इसे समझना ज़रूरी है,
न इसे जीतना।
इसे केवल
अनुभव किया जा सकता है।
और जब कोई पूछता है—
“जीवन क्या है?”
तो शायद जीवन
मुस्कुरा कर कहता है—
“मैं अभी हूँ।”