संभावना की फील्ड
यह कोई जगह नहीं
जहाँ पहुँचा जाए—
यह वह क्षण है
जहाँ पहुँचने की आदत
थककर बैठ जाती है।
यहाँ
बीज अभी नाम नहीं माँगता,
मिट्टी अभी उत्तर नहीं देती,
और हवा
किसी दिशा का प्रस्ताव नहीं रखती।
यहाँ
घड़ी अपनी सुइयाँ
जेब में रख लेती है,
और समय
नंगे पाँव
घास पर चलने लगता है।
यह वह मैदान है
जहाँ शब्द
अर्थ बनने से पहले
थोड़ी देर
काँपते हैं—
और फिर
चुपचाप
धरती पर गिर जाते हैं।
यहाँ
अनिर्णय कोई संकट नहीं,
बल्कि
आकाश की पहली साँस है—
जिसमें
कोई पक्ष नहीं
कोई योजना नहीं।
यहाँ
अनुभव
अपना परिचय नहीं देता,
वह बस
होता है—
जैसे
ओस
नाम पूछे बिना
पत्ते पर टिक जाती है।
यह वह फील्ड है
जहाँ चेतना
जल्दबाज़ी छोड़कर
बैठना सीखती है,
और बैठते-बैठते
खुल जाती है।
न कोई साक्षी खड़ा है,
न कोई दृश्य अलग—
देखना
और देखा जाना
एक ही धड़कन में
घुल जाते हैं।
यहाँ
कुछ भी घटे
तो ठीक,
कुछ भी न घटे
तो भी पूरा।
संभावना की फील्ड
वह मौन है
जो कहता नहीं—
लेकिन
सबको
जगह दे देता है।