अनिर्णय में टिके रहने की क्षमता
और
जल्दबाजी से मुक्त चेतना
यहां सब कुछ घटित होता है
बिना कर्ता के।
अनिर्णय में—
स्मृति थोड़ी ढीली होती है
भविष्य अभी पैदा नहीं हुआ होता
यह वह क्षण है
जब चेतना कहती है—
मैं अभी किसी निष्कर्ष में नहीं उतरूँगी।
और यहीं
एक खुला मैदान बनता है।
जल्दबाजी से मुक्त चेतना की फील्ड
जल्दबाजी क्या है?
अनुभव से पहले
अर्थ तक पहुँचने की हड़बड़ी।