धीरे होना दुनिया की रफ्तार के विरुद्ध नहीं—
वह अपनी रफ्तार को याद करना है।
जब आप धीमे होते हैं:
आप समय को नहीं, क्षण को जीते हैं
आप लक्ष्य नहीं, अनुभव देखते हैं
आप परिणाम नहीं, प्रक्रिया महसूस करते हैं
धीरे होने का सबसे बड़ा चमत्कार यह है—
> आप पहली बार अपने भीतर उपस्थित होते हैं।
वहीं:
विचार पीछे हटते हैं
भावना साफ़ होती है
और इन्ट्यूशन बोलने लगता है
धीमे व्यक्ति के पास
कम जवाब होते हैं
पर ज़्यादा स्पष्टता होती है
धीरे होना आपको अकार्यक्षम नहीं बनाता—
वह आपको संगत बनाता है।