मैं सूखे पत्ते की तरह
चला जाना चाहता हूँ—
इतनी शांति से
कि पेड़ की डाल को भी
पता न चले।
न कोई विदा,
न आख़िरी नज़र—
बस
हवा का एक
अनाम संकेत।
मैं नहीं चाहता
कि मेरी गिरावट
किसी के मौसम को
बदल दे।
पेड़ खड़ा रहे,
जड़ें भरोसे में रहें,
और हरियाली
अपने समय से
उगती रहे।
मेरा जाना
किसी के ठहरने का
कारण न बने—
यही मेरी
सबसे बड़ी
प्रार्थना है।
अगर कभी
किसी सुबह
ज़मीन पर
एक पत्ता दिखे,
तो उसे
साफ़ कर देना—
उस पर
मेरा नाम
मत पढ़ना।
मैं सूखा पत्ता हूँ,
मेरा धर्म
गिर जाना है—
चुपचाप,
बिना किसी को
कम किए।